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आयूं के बाबा टेढ़ेनाथ की अनोखी कथा,जहां टेढ़े है शिवलिंग

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आदेश दीक्षित

पुवायां शाहजहांपुर। क्षेत्र के गांव आयूं में स्थित बाबा टेढ़ेनाथ का प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता इसे क्षेत्र के अन्य शिवालयों से अलग पहचान देती है।

शिवलिंग को उखाड़ने का किया गया था प्रयास

स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन समय में यहां स्थापित शिवलिंग को किसी समय हाथी की मदद से उखाड़ने का प्रयास किया गया था। काफी प्रयास के बाद भी शिवलिंग अपने स्थान से नहीं हिला। इसी दौरान शिवलिंग कुछ टेढ़ा हो गया। इसके बाद श्रद्धालु इसे बाबा टेढ़ेनाथ के नाम से पुकारने लगे।

कहा जाता है कि भगवान शिव के इस स्वरूप के प्रति ग्रामीणों की आस्था लगातार बढ़ती गई। समय के साथ यहां मंदिर का स्वरूप विकसित हुआ और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा। आज भी आसपास के गांवों के लोग बाबा टेढ़ेनाथ को श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजते हैं।

सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के महीने में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। श्रद्धालु भगवान शिव को बेलपत्र, दूध, गंगाजल और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि पर भी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा टेढ़ेनाथ की पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। यही विश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को इस प्राचीन शिवधाम से जोड़े हुए है।

आस्था के साथ जुड़ा है गांव का इतिहास

बाबा टेढ़ेनाथ मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि गांव आयूं की धार्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर से जुड़ी कथा आज भी बुजुर्गों द्वारा नई पीढ़ी को सुनाई जाती है।

हालांकि शिवलिंग के टेढ़े होने की कथा स्थानीय लोकमान्यता पर आधारित है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए बाबा टेढ़ेनाथ के प्रति आस्था सबसे महत्वपूर्ण है।

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